Thursday, February 6, 2020

Gas subsidy ka paisa aa Ni Raha

                                                       Gas subsidy ka paisa aa Ni  Raha

                              हेलो फ्रेंड्स जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मैं अपने लेख में ऐसे विषयों को शामिल करता हूं जो समाज से अछूता रहा है जिसमें मैं अपने विचारों के आधार पर उस विषय की गहराई को छूने का प्रयास करता हूं अगर आपको मेरे लेख अच्छी लगती है तो कमेंट में अपने विचारों को बताइए अगर आप इस ब्लॉग में नए हैं तो प्लीज सब्सक्राइब करें,इससे मुझे अगले लेख के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
                           विजय आज सुबह से बहुत परेशान था विजय की इस तरह खामोशी को देखकर उसके दोस्त ने उससे पूछा-और भाई आजकल क्या चल रहा है लगता है किसी गंभीर विचारों में खोए हुए हो। विजय ने उसे एक टक देखा फिर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बोला-कुछ खास नहीं भाई बस कुछ विषयों पर सोच रहा हूं कि आजकल तो महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और जो वेतन टाइम पर आता है वह भी महीने के लास्ट होने से पहले ही खत्म हो जा रहा है, सेविंग कुछ बच नहीं  रही है, ऐसा ही आगे भी रहा तो क्या होगा मेरा ???
एक तो गैस सिलेंडर की कीमतें भी आसमान छूती नजर आ रही है और तो और गैस सब्सिडी का पैसा भी
अकाउंट पर आते नहीं हैं। विजय ने लंबी सांसे ली और फिर आगे बोलना स्टार्ट किया-पहले जो गैस हमें 424 रुपए में मिलता था आज उसी एक गैस सिलेंडर के लिए हमें 850 रूपए देने पड़ रहे हैं।
                  विजय की यह सारी बातें सुनकर वह बोला-भाई यह बात तो सही बोल रहे हैं आप, शुरुआत में तो गैस सब्सिडी का पैसा तो हमें टाइम पर ही हमारे खाते में आ जाता था,पर आजकल तो काफी महीने बीत गए,मेरे भी अकाउंट पे सब्सिडी का पैसा नहीं आ रहा है। अगर हमारे अकाउंट पर सब्सिडी का पैसा नहीं आ रहा तो आखिर पैसे जा कहां रहे हैं ???यह सभी भ्रष्ट नेताओं और गैस कंपनियों का ही मायाजाल है जिसके कारण हम जैसे आम जनता जनों का शोषण हो रहा है।
इतना कहकर वह वहां से चला गया,पर विजय इस बात को बड़े बारीकी के साथ इस विषय में सोचता रहा और
वह ठान लिया कि इसके बारे में वह कुछ ना कुछ निचोड़ निकाल के ही रहेगा,विजय के मन में दिनभर यही ख्याल आता रहा कि सरकार द्वारा दिया जाने वाला सब्सिडी का पैसा आम जनता के कल्याण के लिए होता है पर जब सब्सिडी का पैसा आम जनता जनों तक पहुंचता ही नहीं है तो जाती कहां है? इस सभी विचार उसके मन की चारों ओर घूम रहे थे…... और वह उस रात अच्छे से सो भी ना सका।
                     अगले दिन सुबह वह गैस डिस्ट्रीब्यूटर के पास गया और अपनी समस्या उनके सामने रखते हुए बोला-सर मुझे एक बात बताइए जब कुछ साल पहले जब एक गैस सिलेंडर के लिए हमें 424 रूपए देने पड़ रहे थे और अभी वही सिलेंडर के लिए हमें 850 रूपए  देने पड़ रहे हैं,सरकार द्वारा बोला गया था कि सब्सिडी का पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट पर आएगा.विजय की यह बात सुनकर गैस डिस्ट्रीब्यूटर गुस्से में आकर, विजय की बात को बीच में ही काटते हुए बोला-यह तुम क्या बकवास कर रहे हो 5 साल पहले महंगाई कम थी और अभी महंगाई बढ़ गई है तो गैस सिलेंडर की कीमतों में भी वृद्धि होगी ही ना। और रही बात सब्सिडी की,तो सब्सिडी का पैसा आ रहे हैं अकाउंट में, यह देखिए-अपने बैंक statement की डिटेल को दिखाते हुए बोले। उनकी इस बात को सुनकर विजय ने बोला-सर महंगाई सच में बढ़ी है या बढ़ाई गई है?? फिर विजय ने उनके बैंक डिटेल को बड़े ध्यान से देखा फिर हल्की सी मुस्कुराहट के साथ उनसे बोला-सर आपका कहना सही है आपके अकाउंट में गैस सब्सिडी का पैसा तो आ रहे है पर जितना अमाउंट आना चाहिए उतना नहीं आ रहे है। यह तुम क्या बोल रहे हो मुझे दिखाओ जरा, गैस डिस्ट्रीब्यूटर ने फिर अपने बैंक स्टेटमेंट को अच्छी तरह देखा उसके एकाउंट में सब्सिडी का पैसा =208 रूपए  show कर रहा था।
                       फिर विजय उनको पूरी बात समझाते हुए बोला-सर जब हम पहले एक गैस सिलेंडर के लिए 424 रूपए  देते थे और हमें एक गैस सिलेंडर मिल जाता था और अभी वही एक सिलेंडर के लिए हमें 850 रूपए  देना पड़ता है और आपके अकाउंट में सब्सिडी का पैसा सिर्फ 208 रूपए  आता है तो बाकी बचा 218 रूपए  गए कहां????

पहले-424रूपए
अभी -850 रूपए
सब्सिडी का पैसा -426 रूपए
अकाउंट में आता कितना है-208रूपए
बाकी बचा पैसा -218 रूपए  गए कहां???
यह बात सुनकर गैस डिस्ट्रीब्यूटर के पैरों तले जमीन खिसक गई, फिर वो लोग मिलकर मामले की शिकायत कलेक्टर महोदय से किए। यह पूरी घटना धीरे - धीरे सभी ओर आग की तरह फैल गई जिसके कारण पूरा प्रशासन सकते में आ गया। इस मामले में कलेक्टर महोदय ने साफ लफ्जो में यह बोल दिया कि ये मामला बहुत ही गंभीर है और मुझे 1 हफ्ते में इसका रिजल्ट चाहिए,और साथ ही साथ इस मामले में जो भी जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्यवाही की जावेगी।
                           1 हफ्ते की कड़ी मेहनत के पश्चात हमारे पुलिस प्रशासन की मेहनत रंग लाई, उन्होंने गैस डिस्ट्रीब्यूटर के मैनेजर को पकड़ा जिसका इस मामले में बहुत ही बड़ा योगदान था। एसपी सर को इंक्वायरी में ऐसी बहुत सी बातें पता चली जो उन्हे हिला कर रख दिया,
कुछ देर के बाद मीडिया वहां पहुंच गई! पर एसपी सर ने मीडिया के सामने मामले कि पूरी बात बता न सके,क्युकी उनको इस मामले को दबाने का ऑर्डर्स उपर से आ गया। फिर एसपी सर ने इस मामले की डिटेल मीडिया को बताते हुए कहा-गैस सब्सिडी स्कैम के पीछे गैस डिस्ट्रीब्यूटर के मैनेजर का हाथ था, जो 3 महीना पहले ही यहां जॉइनिंग हुआ था, इसके पास हमें घर से कैश 90 लाख नगद, 50 लाख के गहने, 25 लाख तक की 2 गाड़ियां, पांच मोटरसाइकिल,बैंक में 30 लाख डिपॉजिट,1 फ्लैट जिसकी मार्केट प्राइस 50 लाख। फिर एक पत्रकार ने सवाल किया-सर इसने ऐसा क्या किया की इतना कम समय में ही इतना ज्यादा पैसा बना लिया?? यह बात कुछ समझ में आ नहीं रही है तो कृपया करके पूरी घटनाक्रम की जानकारी देवे.। एसपी सर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आगे बोले -यह जो अपराधी है वह गैस सब्सिडी का जो फॉर्म आप लोग भरते हैं उस फॉर्म में कस्टमर के बैंक डिटेल की जगह में खुद की बैंक डिटेल भर देता था, जिससे कि कस्टमर के सब्सिडी का पूरा पैसा उसके अकाउंट में चला जाता था,इस मामले में बैंक के मैनेजर को भी अरेस्ट किया गया है जो कि इस मामले का मुख्य आरोपी है।
                        यह सभी बातों को सुनकर वहां मौजूद सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए और सभी तरह तरह की बातें करते हुए वहां से चले गए। परंतु एसपी सर के मन में बहुत से ऐसे सवाल उठ रहे थे जिनका जवाब उनके पास नहीं था, और वे मन ही मन ये सोचने लगे कि गैस डिस्ट्रीब्यूटर के मैनेजर जिसे इस पूरे मामले का मुखय अपराधी समझा जा रहा है ।।।।। ये तो सिर्फ एक मोहरा है, इसके पीछे तो कई नामचीन लोगों का हाथ था जो अभी भी पर्दे के पीछे हैं। एसपी सर को पूछताछ में उस अपराधी की सारी डिटेल मिली, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई करना उन्होंने स्टार्ट किया। काफी जांच पड़ताल के बाद उन्हें यह बात मालूम पड़ी की-उसके बैंक का ट्रांजैक्शन {पर  मंथ} सिर्फ 28 रूपए  ही उसके खाते में आती थी, यह बात सुनने में आपको सिर्फ 28 रूपए  बहुत कम अमाउंट लगता है परन्तु इसे  कैलकुलेट करने पर देखिए कितना होता है……………..

                                    India ki population लगभग=135 करोड़.

                                                              सिर्फ  रूपए 28*135 करोड़=????????????

इतना ज्यादा अमाउंट की हम भारत को एक विकसित देश बना सकते है ????? But यहां के भ्रष्ट नेताओं की ही
यह देन है, जिस कारण भारत कभी आगे बढ़ नहीं पा रहा है। और अब हम बाकी के बचे 190 रूपए  कहा जाते है, इसे जरा समझ लेते है।  फिर एसपी सर ने इंक्वायरी को आगे बढ़ाया तो उनको चौका देने वाली बातें सामने आई-गैस कंपनियां और भ्रष्ट नेताओं की आपसी मिलीभगत के कारण सब्सिडी का पूरा पैसा आम जनता तक पहुंच ही नहीं पाती है, पैसे तो आती है पर सिर्फ नाममात्र का,जो पैसा नाममात्र आता भी है तो उस गैस के मैनेजर जैसे लोग उस पैसे को अपनी जेब में भर लिया करते हैं। इस मामले की पूरी inquiry के पश्चात एसपी सर को यह बात पता चला कि-जो बाकी के बचे 190 रूपए  कस्टमर के अकाउंट में सब्सिडी के तौर पर कभी आते ही नहीं थे???
                 यह सभी सब्सिडी की बातें नेताओं व गैस कंपनियों के द्वारा जनता के Mind में मीडिया के माध्यम से विश्वास दिलाते हुए ये बात बैठा दी जाती है कि हम आपका एक भी पैसा नहीं ले रहे हैं बल्कि हम आपका पूरा पैसा सब्सिडी के रूप में आपके अकाउंट तक पहुंचाने का विश्वास दिलाते हैं। यहां की जनता बहुत ही भोली है जो आंख बंद करके उन पर विश्वास कर लेती है। और जब एसपी सर ने इस मामले से पर्दा उठाने की कोशिश करते हैं तो उनके पास मामले को दबाने हेतु ऊपर से धमकी भरे ऑर्डर्स आने लगते हैं,-तुम अपना कीमत बोलो 1 घंटे में तुम्हारे पास पैसे पहुंच जायेंगे ,अगर एसपी सर इस काम को करने में मना करेंगे तब उनकी फैमिली को जान से मारने का धमकी आने लगेगी…….E.T.C.

लेखक की कलम से………..


         मैंने अपने पुराने एक लेख में एक बात का जिक्र किया था, भारत गरीब देश नहीं है, बस यहां की कुछ भ्रष्ट
नेता और बड़ी कंपनियों के द्वारा यहां की आम जनता का शोषण होता आ रहा है……..जो लोग यहां ईमानदारी पूर्वक काम करते हैं उनको गलत काम करने के लिए पहले तो उन्हें पैसों का लालच दिया करते हैं अगर वे लोग नहीं मानते हैं तो उनके घर वालों को जान से मारने तक की धमकी दी जाती हैं। कोई भी इंसान अपने घर वालों का बुरा हाल, सपने में भी नही सोच सकता,इसी का वो लोग फायदा उठाते हैं। इस लेख में भी एसपी सर के चुप्पी साधने की प्रमुख वजह वही थी। अंत में मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा-अगर आपको मेरी लेख अच्छी लगती है तो मेरे ब्लॉग को सब्सक्राइब करें, जिससे आपको मेरे न्यू आर्टिकल के आने पर आपको नोटिफिकेशन मिल जाएगा।
                                                                                                                                                                                                                                                                                                             Thank..u...

Monday, February 3, 2020

rojgar ki aisi mar hm rhe berojgar

                  rojgar ki aisi mar hm rhe  berojgar

            जैसा कि हम जानते है, आज भारत की आबादी 135  करोड़ से भी अधिक है,और यहाँ हर 2  सेकंड में 3 बच्चे जन्म लेते है। जिस रेसिओ से भारत की जनसंख्या बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे यहाँ रोजगारो  के अवसरो  में भी कमी होती जा रही है। यहाँ बेरोजगारी होने के बहुत से कारण है, आज मैं इस लेख में एक अनछुए पहलु को छूने  का प्रयास किया है। जो आज देश में नेताओ व आला अधिकारी के लोगो  दवरा बेरोजगारी के नाम पे बहुत बड़ा पैसो का खेल खेला  जा रहा है। इसे मैं एक उदहारण दवरा समझाने  का कोशिस किया है.  


आज मेरे जॉब का रिजल्ट आने वाला है-

               आज रवि सुबह से ही बहुत  खुश था क्युकि  आज उसके  जॉब का रिजल्ट आने वाला था।और वह घर से नाहा धो कर घर से कुछ दुरी पर ऑनलाइन शॉप जाने के लिए निकला। रवि अपने ही धुन में चला जा रहा था तभी रास्ते  में उसके एक दोस्त से उसकी मुलाकात हुई,दोस्त ने रवि को टोकते हुए बोला-और भाई रवि सुबह-सुबह किधर को चल पड़े? रवि ने उसको बताया-आज मेरे जॉब का रिजल्ट आने वाला हे ,उसी को देखने जा रहा हूँ.पप्पू भैया के शॉप पे {ऑनलाइन शॉप} रवि ने फिर आगे बोला-यार तेरा भी तो रिजल्ट था न? क्या हुआ? हम दोनों ने तो साथ में ही फॉर्म भरे थे न?रवि की यह बात सुनकर उसके दोस्त ने बताया-रवि भाई तेरे को जाने से कुछ फ़ायदा नहीं होगा,चल वापिस चलते है घर....... दोस्त की यह बात रवि को थोड़ी अजीब सी लगी फिर रवि ने उसको बोला-भाई तू ऐसा क्यों बोल रहा है,बोल न हुआ क्या है. .....

जो कुछ नई करता,वही आगे चलकर कमाल करता है-

               रवि के दोस्त ने फिर  उसे सारी बातें बता दी - भाई हमने जिस जॉब के लिए जो फॉर्म भरे थे वह किसी कारणवश कैंसिल हो गयी है। अब अगली बार जब किसी जॉब की वेकन्सी निकलेगी फिर से नई फॉर्म भरनी पड़ेगी। दोस्त ने उदास मन से बोला। यह बात सुनकर रवि को रोना आ गया और वह रोता हुआ बोलता है-भाई ये सब  क्या हो गया,इस बार मैंने इस जॉब के लिए बहुत मेह्नत किया था,सुबह पार्ट टाइम जॉब जाना ,लंच टाइम को पढ़ाई करता ,शाम को घर वापिस आना,फिर शाम का भोजन कर सारी रात बैठकर पढ़ाई करना। घर की सारी जिम्मेदारिया मुझ पर ही टिकी है,आज के टाइम पे जॉब का लग जाना मतलब भगवान प्राप्त करने के बराबर है। यह सब बातें  सुनकर रवि के दोस्त ने उसे आश्वासन देते हुए बोला-भाई तू टेंशन न ले,ऊपर वाले ने  हमारे लिए भी  कुछ न कुछ  जॉब जरूर देखा होगा।जो टाइम आने पर हमे जरूर मिलेगा।
                 जो कुछ नई करता,वही आगे चलकर कमाल करता है.बस अभी हमे उस पल का इंतजार करना है, आज नहीं तो कल सफलता हमारे कदम जरूर चूमेगी।यह बात सुनकर रवि का मन थोड़ा हल्का हुआ,फिर दोनों अपने-अपने घर  तरफ चल पड़े.

आप लोग जिस जॉब के लिए फॉर्म भरे थे वो फर्जी था-

                   कुछ दिनों के बाद रवि के फ़ोन पे कॉल आया,कॉल करने वाला पप्पू भैया थे.उन्होंने रवि को बताया की-भाई नई जॉब आयी है अगर आपको  फॉर्म भरना हो तो आओ हमारी शॉप पे........ इस बार बहुत ज्यादा पोस्ट है भगवान का आशीर्वाद रहा तो इस बार आपका जॉब लग ही जायेगा,फॉर्म भरने का लास्ट डे 2 दिनों  के बाद है,इतना कहकर पप्पू भैया ने फ़ोन काट दिया।दूसरे दिन सुबह रवि और उसके दोस्त जॉब की फॉर्म भरने के लिए पप्पू भैया के शॉप गए........ वो लोग अपना अपना फॉर्म भरवाय और अपने घर वपिस चले आये,और इस बार वे और भी ज्यादा जी जान से  मेहनत करने  लगे। कुछ दिनों के बाद एग्जाम का डेट नजदीक आने लगा,तो वो लोग और ज्यादा मेहनत  करने लग गए.कुछ दिनों में उनका एग्जाम हुआ....... दोनों एग्जाम दे कर खुशी-खुशी  घर लौटने लगे,क्युकी दोनों का एग्जाम अच्छा गया था। 
              महीने भर के अन्दर  उनका रिजल्ट आने वाला था, दोनों काफी बेस्रबी से रिजल्ट का इंतज़ार करने लगे। कुछ दोनों बाद उनका रिजल्ट आया


उनके सवालो का कोई जवाब न था ???
और वे लोग पप्पू भैया की शॉप की तरफ चल पड़े,वहाँ पहुंचने के बाद वे लोग एक साथ बोल पड़े-पप्पू भैया हमने जिस जॉब के लिए अप्प्लाई किया था उसका रिजल्ट देख कर बताये जरा?  यह बात सुनकर पप्पू भैया चुप हो गए,पप्पू भैया के इस तरह चुपी का कारण  उन दोनों को समझ नई आ रहा था फिर वे  लोग बोले-भैया क्या हुआ कुछ तो बताइए ? पप्पू भैया ने अपनी चुपी तोड़ते हुए बोले-मैं तुमलोगो से क्या कहूं कुछ समझ में नई आ रहा है। फिर दोनों ने फिर बोला-बताइये रिजल्ट का क्या हुआ?

                फिर पप्पू भैया बोले-आप लोग जिस जॉब के लिए फॉर्म भरे थे वो फर्जी जॉब था। ये बात सुनकर दोनों के होश उड़ गए। और वे लोग फूट-फूट के रोने लगे। दोनों ने बोला-पप्पू भैया इस बार हमारा एग्जाम बहुत ही अच्छी तरह बने थे,इस बार तो सेलेक्शन होना तय था। पर ये सब क्या हो गया। पप्पू भैया और वहाँ  खड़े सभी लोग बड़े खामोसी से ये सब देख रहे थे,क्युकी वहाँ खड़े किसी के पास उनके सवालो का कोई जवाब नई था ???

                    रवि और उसके दोस्त के साथ जो हुआ,वह घटना  बहुत  ही  जटिल और गंभीर  है.भारत में बेरोजगारी का आलम चरो सीमा पर है,यहाँ भ्रस्ट नेताओ और आला अफसरों के लोगो दुवरा फर्जी साइट्स बनाकर हम जैसे बेरोजगारों से नौकरी का आशा दिला कर मन चाहा पैसे लूट रहे है। इसे हम और एक उदाहरण दवरा समझते है------
                  एक फर्जी साइट्स से फर्जी जॉब के लिए  50 पोस्ट  निकलती है और माना कि उस पोस्ट को पाने के लिए कम से कम  1000 लोग अप्लाई करते है, और पोस्ट की अप्लाई के फीस- 200 रुपए होती है। और इसके साथ जहा से हम फॉर्म भरवानगे उसे हमे - 50-100  रुपया देने पड़ेंगे । हमारी पूरा खर्चा-200 +50 = 250/रुपए
 जॉब के अप्लाई करने वालो की संख्या -1000  *  जॉब के लिए अप्लाई करने की फीस -200 
                                                          1000 *200 =2 लाख 
           अब जरा आप ही सोचो,मैंने तो सिर्फ 1000 बेरोगारों के फॉर्म भरने की बात की है , भारत में आज कल दिन ब दिन बेरोजगारों की संख्या में तेजी होती जा रही है। और  यदि अगर  1000 बेरोजगारों की जगह 50  हजार बेरोजगार लोग फॉर्म भरते है,तो सोचिये  कितने  पैसे उनके पास जा  रहे  है ?????????????
                                                                                        CANDIDATE- 50000 *200 =  1 करोड़ 

               फिर आती है एग्जाम की पारी,सभी कंडीडेट का एग्जाम सेण्टर निर्धारित होता है.और एग्जाम के टाइम सभी कंडीडेट अपनी अपनी सुविधा अनुसार पैसे खर्च करके {बस,ट्रैन,टैक्सी } से एग्जाम सेण्टर तक पहुंचते है।एक कंडीडेट का आने-जाने,खाने-पान,रहने का खर्चा मान लीजिये-1500 से 2000. यह खर्चा दुरी के हिसाब से होता है -एग्जाम सेंटर से जितना लम्बा दुरी,उतना ही ज्यादा खर्चा।  और फिर सारे कैंडिडेट वहाँ जाकर  एग्जाम लिख कर बड़े उम्मीद से रिजल्ट आने की राह देखते रहते है।  जब उनको कुछ महीनो के बाद ये पता चलता है कि हमने जिस जॉब  के लिए फॉर्म भरे थे वो साइट्स फर्जी था। यह सुनकर अब आप ही  सोचिये हम बेरोजगारों पर क्या बीतता है???????????????
 इस तरह की फर्जी साइट्स और फर्जी जॉब के कारण वो लोग हमसे  कितना पैसा लूट रहे है। इसका अंदाजा लगा पाना बहुत ही मुश्किल व जटिल है। क्युकि  आजकल  ऐसी घटना बहुत हो रही है,जिनका सही समय पर पता लगाना उचित होगा जिससे हम जैसे बेरोजगार लोगो का पैसा उनके पास पहुंच न  जा सके।


लेखक के कलम से. .........

                                                    अंत में मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा,कि फ्यूचर में ऐसी घटना न हो.इसके लिए हमे हमेशा  एक्टिव रहना पड़ेगा,क्युकी ये बात आप भी जानते है ऐसी घटना किनके द्वारा उत्पन होती है.????? मेरे इस लेख के जरिये मैं उन लोगो तक अपनी बात पहुंचाने  का कोशिस किया है  जो इस तरह की घटनाओ से अनजान है,ताकि भविष्य में  रवि और उसके दोस्त की तरह ऐसी घटना उनके साथ भी न हो सके।इस लेख में आपकी यदि कोई राय हो तो आप मुझे कह सकते है,अगर आपको मेरी यह लेख पसंद आयी हो तो इसे जरूर शेयर कीजिये।

                                            
                                                    
              

Sunday, February 2, 2020

DAM GHUM GE HE


                                              DAM GHUM GE HE



          डैम घूम गए हे....... आपको यह बात सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा होगा, परंतु यह बात हमें कुछ देर में मेरे इस लेख में समझ जाएगा कि इस बात में कितनी सच्चाई है……….
           जैसा की हम जानते है,भारत एक कृषि प्रधान प्रधान देश है, और यहां की जनता अधिकांशत कृषि पर ही डिपेंड है, फिर भी यहां के लोगों में आपसी संबंध बहुत ही मधुर है। आज हम भारत  के एक गांव की बात करेंगे जहां की जनसंख्या काफी कम है, जिस वजह से यह गांव  सभी सरकारी योजनाओं से दूर है, इस गांव में एक बार पुलिस स्टेशन में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया जो भारत के सभी भ्रष्ट नेताओं के कर्मों का परिणाम था।
                               मामला हुआ कुछ इस तरह………
       गांव वाले सभी लोग थाने गए और रिपोर्ट में यह लिखाया  गया कि -हमारे गांव से डैम गुम हो गया है, आप हमारे गांव  की डैम को ढूंढ़ने में हमारी सहायता कीजिये यह बात सुनकर सभी थाने की पुलिस अफसर आश्चर्य में पड़ गए,क्युकी यह बात उनके गले से उतर नहीं रही थी और वे सोचने लगे कि डेम आखिर घूम कैसे सकता है? एक अफसर ने ऊंची आवाज लगाते हुए बोला-यह तुम लोग क्या बकवास कर रहे हो डेम कैसे घूम सकता है तुम सब शराब पीकर तो नहीं आए हो ना??? यह बात सुनकर एक किसान बोला-साहब हमन सच बोलत ही कि हमर गांव के डैम हारे घूम गे हे,हमर गांव में पानी की समस्या होहत रहे तो सरपंच हारे सरकारी योजनाओं से हमर गांव में डैम बनी बोलकर हमर सब से साइन लेहीस आओ  कागज के सरकारी दफ्तर मां आवेदन दहिन। और फिर किसान अपनी बात को आगे जारी करते हुए बोलता है-पटवारी हरे नक्शा मां तो तालाब के होना दर्शाई है, और जब हामन लोग मने नक्शा के आधार पर उस जगह मां  गईल, तो वहां पता चलिस ओजक तो ना ही कोई तालाब रहीस और ना ही कोई डैम।

           साहब अब तो तू मन हमके ये बतावा की हमर गांव के डेम हरे  कहां गईस??? यह बात को सुनकर सभी अफसर खामोशी की आगोश में समा गए, और फिर एक अफसर धीरे स्वर में बोले-आप लोग चिंता ना करें आप लोगों की यह समस्या बहुत ही गंभीर है और इस मामले को हम आला अधिकारी तक पहुंचाएंगे, जिससे आपकी इस समस्या का समाधान हो सके। और मैं यह विश्वास दिलाता हूं कि इस मामले में जो भी जिम्मेदार है उनके खिलाफ उचित कार्यवाही की जावेगी।आप लोग अपने अपने घर जाइए हम इस मामले की जांच करना अभी से स्टार्ट कर देते हैं, अफसर की यह संतोषप्रद बात सुनकर सभी अपने अपने घर की ओर हो लिए।
           दूसरे दिन सभी अफसर इस मामले की जांच के लिए सरपंच के पास पहुंचे, और फिर वहाँ सवाल जवाब का कार्यक्रम स्टार्ट हुआ, गांव के सरपंच ने साफ लफ्जो में यह कह दिया-सर मुझे इस मामले में कोई भी जानकारी नहीं थी, इस मामले में शायद बैंक मैनेजर को पता होगा! फिर सभी अफसर उस बैंक में गए जहां से डैम बनाने हेतु पैसा डिपॉजिट किया गया था, वहां जाकर पता उनको ये चला कि डैम बनाने के लिए एक करोड़ की राशि आई हुई थी, यह बात सुनकर सभी चौक गए।और सोचने लगे जब गांव में डैम बनाने हेतु 1 करोड की राशि आई हुई थी तो पूरे पैसे गए तो गए कहां???
       अफसर ने सरपंच से पूछने की कोशिश की तो सरपंच के पसीने छूटने लगे, यह देखकर ऑफिसर को समझ में गया था कि इस मामले के पीछे सरपंच का बहुत बड़ा  योगदान है। एक ऑफिसर ग़ुस्से में आकर  सरपंच को दो थप्पड़ जड़ दिए फिर उससे पूछे-डैम बनाने के लिए जो पैसे आए थे वह कहां है, ऑफिसर के थप्पड़ ने कमाल कर दिया सरपंच ने तोते की तरह सारी कहानी बक दी। साहब मेरे को इस  काम के लिए सिर्फ 3 लाख ही मिले थे बाकी का पैसा कहां गया मुझे नहीं पता। फिर एक ऑफिसर ने बैंक के मैनेजर को कठोर शब्दों में पूछने के बाद कुछ देर में ही वह टूट गया फिर वह अपना गुनाह कबूल कर लिया। जब उससे पूछा गया तुमने इस काम के लिए कितना पैसा खाया तो उसने बताया - सर मुझे सिर्फ 5लाख  ही मिले थे, बाकी का पैसा कहां गया मुझे नहीं पता?
    फिर सभी ऑफिसर पटवारी और आर आई के पास गए, फिर उनसे सवाल-जवाब का सिलसिला प्रारंभ हुआ,शुरू में वह लोग भी इस मामले में इंकार कर रहे थे फिर 5 घंटे लगातार इंक्वायरी के बाद वह लोग भी टूट गए और वे लोग भी अपना गुनाह कबूल कर लिया।जब उनसे पूछा गया इसके लिए तुम लोगो ने कितना पैसा लिया था तो पता चला कि वह दोनों ने मिलकर 15 लाख  रुपए के सरकारी फंड का चूना लगाया। फिर ऑफिसर लोग तहसील ऑफिस के आला अधिकारियों से पूछताछ के लिए तहसील ऑफिस गए, वहां भी कुछ घंटों के बाद वह लोग अपना गुनाह कबूल कर लिए, उन्होंने मिलकर लगभग 30 लाख का गबन किया। फिर कार्यवाही को जारी रखते हुए ऑफिसर लोग नेता जी के पास पहुंचे, और उनसे मिलकर मामले का जिक्र करते हुए उनके सामने अपनी बात रखी-सर एक गांव का मामला आया है जहां डैम गुम हो जाने का रिपोर्ट लिखाई गई है, हमें जांच में पता चला कि डैम बनाने हेतु पैसे तो आए थे पर ना तो वहां कोई कार्य हुआ है और ना ही कोई डैम बना है?

       नेता जी ने लंबी सांसे ली फिर वह बोले अबे साले गधे उस गांव में डैम बना ही कब था जो कि वह गुम हो जाएगा…….. हम नेता गन हैं,  की पब्लिक की सेवा के लिए  हैं? तुमको कितना चाहिए इस मामले को दबाने के लिए अपना कमीशन लो और यहां से चलते बनो, इतना सुनकर एक ऑफिसर ने बोला-सर यह गलत है जब सभी जनता आप पर इतना विश्वास करते हैं कि आप उनका कल्याण करोगे और आप जनता का ही शोषण कर रहे हैं….. फिर नेताजी गुस्से में आकर बोले-हमें यूं ही इलेक्शन में जीत नहीं जाते, सभी को पैसे, दारू, मुर्गा खिला कर ही हम वोटिंग अपने तरफ शामिल करते हैं। जब तक आम जनता पैसे, दारू, मुर्गा में ही बिक जा रहा है तब तक हम नेताओं का जीतना तय है। हम इलेक्शन के टाइम में 30 लाख तक का खर्च किए हैं, तो उस पैसे का रिकवरी तो करनी पड़ेगी ही ना??
     इतना बोल कर नेताजी बाहर निकले और सभी जनता जनों को संबोधित करते हुए बोले-मुझे इस मामले की जानकारी अभी प्राप्त हुई है, और यह मामला बहुत ही गंभीर और जटिल है,मैं आप सभी को यह विश्वास दिलाता हूं कि जो भी इस मामले में दोषी है, उनके खिलाफ उचित कार्यवाही की जावेगी। इतना सुनकर सभी जनता गण तालियों की बौछार करने लगे। और सभी ऑफिसर लोग वहां खड़े बड़ी खामोशी के साथ यह सब देख रहे थे, और उनके मन में बहुत से सवाल उनके ओत-प्रोत घूम रहे थे-
1.-क्या जनता की सोच नेताओं के प्रति भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा?
2.-अब फिर से अगला गांव कौन सा होगा?
3.-अब जनता के कल्याण के लिए सरकार द्वारा आया हुआ पैसा फिर से कहीं खो जाएगा?
4.-शायद यही वजह है कि इंडिया में महंगाई बहुत ज्यादा है?
5.-यहां सभी नेताओं के साथ-साथ आम जनता भी घूसखोर हो गए हैं?
6 .-53 लाख का हिसाब तो समझ में आ गया परंतु बाकी के 47 लाख़ गए कहाँ????
लेखक के कलम से……….

           -अंत में मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि, भारत के लोग गरीब नहीं हैं बस कुछ भ्रष्ट नेताओं की सोच का ही यह परिणाम है। वो लोग भी यही चाहते हैं कि एक किसान का बेटा सिर्फ किसान ही बने…... अगर वह आगे पढ़कर डॉक्टर या इंजीनियर बनना भी चाहे तो वाह कभी बन नहीं सकता,क्योंकि आपको भी ये बात पता है यहां डोनेशन के नाम से ही इतना फीस वसूल ली जाती है कि एक आम आदमी उसका निर्वाह खुद को बेचकर भी नहीं कर सकता……….